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  • November 30, 2020

कभी कभी

कभी-कभी

कभी कभी मेरे दिल मैं ख्याल आता हैं कि
अमिताभ न होते तो जीवन कैसा होता ?
मेरे पास माँ है, तेरे पास क्या है ?
कहकर कौन इतराता ?
रोटी चुराकर खाने का पाप,
सरकारी तंत्र के सिर पर लगेगा ,
यह महसूस कौन करवाता ?
अमिताभ न होते तो देश का युवा
ऐक्शन में कैसे आ पाता ?
एक लावारिस भी हासिल
कर सकता है ऊंचा मकाम,
ये क्या आसान बन पाता ?
मज़दूरों , शोषितों की आवाज़
आज़ाद बन ,कौन उठाता ?
अमिताभ न होते तो हँसा-हंसा कर
लोट-पोट कौन कर जाता ?
सोचा है कभी ?
जो अमिताभ न होते तो प्रेम त्रिकोण को
खूबसूरती से कौन सुलझाता?
खनकते सिक्कों पर हावी रहते हैं रिश्ते
इस सच से पर्दा कौन उठाता ?
अमिताभ न होते तो पुलिस की ताकत
और मुजरिमों की हिमाकत कौन सुलटाता ?
सोच कर देखना जो अमिताभ न होते !
अमिताभ न होते तो हम पर
होली का रंग कैसे बरस पाता ?
अमिताभ न होते तो
उजड़े बाग का बागबान
फिर से कैसे बहार ला पाता?
अमिताभ न होते तो देश में हिंदी भाषा को
आसमान पर कौन बैठाता ?
सच में , अमिताभ न होते तो !
अमिताभ न होते तो सरकारी योजनाओं को
आसानी से हर आमजन कैसे समझ पाता ?
अमिताभ न होते तो हमारा बालीवुड
सदी के महानायक की झलक
को तरस जाता !
अमिताभ न होते तो एक आमजन
करोड़पति कैसे बन पाता ?
अमिताभ न होते तो उम्र बस
एक नंबर भर है ये कैसे समझ आता ?
अमिताभ न होते तो यह देश इस
अद्भुत व्यक्तित्व से कैसे मिल पाता ?
मगर सच तो यह है कि ,
अमिताभ हैं और सदा रहेंगे ,
हम हरपल उनके साथ सिनेमा को
यूंही जीया करेंगें !
फिर चाहे वो सात हिंदुस्तानी का उर्दू शायर
अनवर अली हो या गुलाबो सिताबो का
मकान मालिक मिर्ज़ा शेख !
क्योंकि अमिताभ है तो हम हैं !
और हम हैं तो अमिताभ !
©®#Sugyata सुजाता

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