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  • September 21, 2020

पहचान

“अरे रीमा जल्दी करो ,देर हो रही है पार्टी में सब वैट कर रहे हैं यार ,तुम्हारे कारण लेट हो जाऊँगा मैं ” समीर एक साँस में बोल गया ।”अरे बस हो गया ,बच्चों को तैयार कर रही थी “।कमरे में से रीमा की आवाज़ आई ।

“आकर टाई तो बाँध दो ” समीर तमतमाते हुए कहने को ही हुआ इतने में रीमा दोनों बच्चों यश और कीर्ति को लेकर आई ।

“इतने बड़े बिजनेसमैन और टाई बाँधनी भी नहीं आती”।रीमा ने समीर की टाँग खीचते हुए  कहाँ ।

“अरे !बड़े बिजनेसमैन होने का यही तो फायदा है और कोई काम भले न कर पाए हम ,कोई इतना ध्यान नहीं देता ,आख़िर जाने माने बिजनेसमैन की पहचान है मेरी ,तुम्हारी तरह थोड़ी “मिसिज़ समीर” ,इतने बड़े “बिजनेसमैन की बीवी” ,चलो अब देर हो रही है पार्टी के लिये “समीर बड़े नाज से बोला।

पार्टी में एक दोस्त ने कहाँ “अरे!समीर भाभी से तो मिलवाओ”।

“हाँ ,हाँ क्यों नहीं !”एक फ़ीकी सी मुस्कान बिखेरते हुए समीर ने जवाब दिया ।

“रीमा !रीमा ज़रा यहाँ आना “

रीमा समीर के किसी पार्टनर की बीवी से बात कर रही थी तो उसने थोड़ा जोर से आवाज़ लगाई ।

“हाँ ,आती हूँ , एक्सक्यूज़ मी शिखा जी ,मैं अभी आई “कहते हुए रीमा समीर के पास गई ।

 

“लो इनसे मिलो ये है तुम्हारी भाभी ,”मिसिज़ समीर “और यह है मेरे बिज़नेस पार्टनर सतीश “समीर दोनों का परिचय करवाते हुए बोला ।

 

“हेलो भाभी “, “वैसे भाभी भी तुम्हारी तरह बिज़नेस एक्सपर्ट ही होंगी “हँसते हुए सतीश ने समीर से कहाँ ।

 

“नहीं ,मैं तो …..”रीमा की बात बीच मे ही काटते हुए समीर हँसकर बोल पड़ा।

 

“अरे !नहीं ,नहीं तुम्हारी भाभी को तो उनका किचन ही रास आता है बिज़नेस ,विजनेस इनके बस की बात नहीं “।

 

“मैं बच्चों को देखकर आती हूँ ,कही आपस मे लड़ तो नहीं रहे “समीर के व्यंग्य से दुःखी रीमा बहाना बनाकर वहाँ से चली गई ।

 

उसके बाद भी दो घण्टे लम्बी चली पार्टी के बाद रीमा ,समीर और बच्चों के साथ घर लौट आई । कपड़े बदले और बच्चों को सुलाने के बाद रीमा ने समीर से बात करने की कोशिश की ।

“समीर ,तुमने अपने पार्टनर से क्यों कहाँ कि मुझे किचन ही रास आता है ,ट्यूशन तो मैं भी लेती ही हूँ न ,क्यों नही कहाँ और तो और मुझे भी नहीं बोलने दिया तुमने”। थोड़ी नाराजगी से रीमा बोली ।

“अरे तो ट्यूशन करके कौनसा पहाड़ तोड़ दिया  , इतना बड़ा जाना माना बिजनैसमैन और उसकी बीवी ट्यूशन टीचर,मेरी रेप्यूटेशन का कुछ तो ख़्याल करूँगा ना मैं भी  ,चलो अब सो जाओ सुबह उठना भी है “कहकर समीर सोने चला गया ।

बेड पर लेटे लेटे खुली आँखों से भी रीमा उस दिन की याद में पहुँच गयी थी जब नई नई शादी के बाद समीर ने उसके डॉक्युमेंट्स पर भी उसका नाम चेंज करवाने की जिद की थी यह कहते हुए कि “अब मेरा नाम ही तुम्हारी पहचान है ” रीमा ने भी समीर का मन रखने के लिए बेमन एक -दो कागज़ात पर “रीमा समीर जोशी ” नाम करवा दिया था । पर क्या पता था कि वो खुद कही खो जाएँगी।

 

फिर कुछ सोचकर स्टोर रूम में गयी “कितनी अच्छी पेंटर थी मैं ,सब मेरे नाम से पहचानते थे मुझे और आज बस ये यादें ही नहीं जैसे मैं ख़ुद इस संदुक में बंद सी हो हई हूँ  ” कुछ पेन्टिंग्स और आर्ट एंड क्राफ्ट समीर से छुपकर बनाये थी उन्हें निहारते हुए रीमा मन ही मन बुदबुदाई ।

 

कुछ सोचकर और एक निश्चय कर रीमा आई और अगले दिन बेटी कीर्ति की स्कूल में उसकी टीचर से मिलने गयी ।

 

“अरे आओ आओ रीमा “रुचि जो उसकी बेटी की टीचर थी उन्होंने कहाँ ।

“वो आपसे कुछ बात करनी थी “रीमा बोली ।

 

“हाँ ! बोलो ना “रुचि बोली ।

“याद है आपको ,आपने एक महीने पहले मुझे अपनी स्कूल में बच्चों को पेंटिंग और आर्ट एंड क्राफ्ट सिखाने के लिए कहाँ था,मैं तैयार हूँ मैम ,पर दिन में कुछ वक्त ही दे पाऊँगी मैं “रीमा ने एक साँस में बात खत्म की ।

 

“यह तो बहुत अच्छा सोचा तुमने ,कीर्ति की ड्राइंग ,पेन्टिंग्स इतनी अच्छी होती है कि मैं तुम्हें बोले बिन रह ही नहीं पाई ,टाइमिंग की चिंता मत करो ,फ़िलहाल गेस्ट टीचर की ही जरूरत है ,तुम कल से ही आ जाओ “।

समीर के ऑफिस जाने के बाद वो जाती स्कूल और उसके लौटने से पहले आ जाती ।
रीमा बहुत ही  तन्मयता से बच्चों को सिखाती इसलिए कुछ समय मे ही बच्चों की फेवरेट बन गयी थी ।

 

पर इन सबके बीच वो समीर से अलग थलग सी हो गयी थी ।

कुछ दिनों बाद स्कूल प्रशासन ने तय किया कि स्थायी रूप से रीमा को स्कूल में नियुक्त किया जाये ।

 

शाम को रीमा समीर के ही आने की राह देख रही थी थोड़ी देर बाद ,समीर आया ,खाना वाना सब निपटने के बाद  रीमा ने समीर के हाथों में एक लिफ़ाफ़ा पकड़ा दिया और कहाँ “इसे खोलो और पढ़ो समीर “।

“ये है क्या पर ,बताओ तो “समीर ने उत्साहित होकर पूछा ।
“मेरी पहचान “रीमा ने चेहरे पर संतुष्टि का भाव लाकर कहाँ।
समीर ने लिफ़ाफ़ा खोल कर देखा तो उसमें रीमा का नियुक्ति पत्र था कुछ समय के लिए समीर को समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ ।

“यह क्या है रीमा ,अपॉइंटमेंट लेटर ,वो भी कीर्ति की स्कूल में, कब ?कैसे? “।समीर ने हैरानी से पूछा ।

“हाँ, मैंने तुम्हें नहीं बताया पर मैं कुछ वक्त से कीर्ति की स्कूल में बच्चों को पेंटिंग और आर्ट एंड क्राफ्ट बनाना सिखाती हूँ “। रीमा डरते हुए बोली ।

 

“पेन्टिंग और तुम ,तुमने कब सीखी और मुझे बताया क्यों नहीं कि तुम कीर्ति की स्कूल में काम कर रही हो “।चौकते हुए गुस्से से समीर ने पूछा।

“चौको मत ,कभी ये सब मेरा शौक था पर शादी के बाद अपने नाम की तरह इस शौक को भी छोड़ दिया ।क्या बताती तुम्हें ,तुम यही कहते कि तुम्हारी रेप्यूटेशन के हिसाब से मेरा ये काम सही नहीं है ,है ना । मैं तो तुम्हारे लिए घर की मुर्गी दाल बराबर थी ,तुमने मुझे नजरअंदाज किया सो किया पर मैंने भी खुद को किया  । 

 

अपने बच्चों और तुम्हारे लिये खुद को मारती रही पर तुम अपने पार्टनर दोस्त से इतना नहीं कह पाये कि हाँ ,लेती है मेरी बीवी ट्यूशन ,”रीमा ओर कुछ बोलती उसके पहले हो समीर बोल पड़ा “कहाँ की बात को कहाँ ले गयी मैंने तो दिल्लगी की थी यार”।

 

 क्या जताना चाहते हो तुम ,हूँ मैं मिसिज़ समीर ,हूँ मैं बिजनेसमैन की बीवी पर ,क्या बिजनेसमैन की बीवी की अपनी पहचान नहीं होती ?जैसे तुममें व्यवसायी का कौशल है वैसे ही मेरे लिए आर्ट है ,।रीमा उसे समझाने की कोशिश कर रही थी।

 

“इतने वक़्त से देख रहा हूँ ,तुम कटी कटी सी रहती हो मुझसे ,आज समझ आया और अब कम्बल में लपेट लपेट कर मार रही हो “समीर बोला।

 

“मुझे तुम पर कोई गुब्बार नहीं समीर न लपेट रही हूँ कुछ , तुम्हारे कारण ही तो फिर से खड़ी हो पाई। अपने आप से ही लड़ते लड़ते कब तुमसे कट गई पता ही नहीं चला ,सोचती रही कि शादी के बाद मैं,मैं रही ही नहीं  , बस तुमसे ही होकर रह गई  “ख्यालों के समन्दर में गोते लगाते हुए रीमा ने कहाँ ।

“मतलब तूमने तय कर लिया कि तुम जॉब कंटिन्यू करोगी ही “समीर रीमा के चेहरे पर आते जाते भावों को पढ़ने की कोशिश करते हुए बोला ।

” दुबारा वहीं गलती नहीं करूँगी ,समीर  छोटी हो या बड़ी , जैसी भी हो इंसान की अपनी एक आइडेंटिटी होती है ।

एक  बिजनेसमैन को ये शोभा नहीं देता कि वो किसी के हुनर , किसी की पहचान का मख़ौल उड़ाए , मुझे विश्वास है एक न एक दिन तुम खुद मेरे इस फैसले से खुश होंगे “डर की बजाय अब दृढ़ता के साथ रीमा बोली ।

 

“जब तुमनें तय कर ही लिया है तो एक दिन क्यों अभी से तुम्हारे साथ हूँ ,तुम्हें कम आँक कर जो गलती की उसे सुधारना तो पड़ेगा ना “।समीर ने   रीमा के आत्म विश्वास और अटल निश्चय को भाँपते हुए उसके  इस निर्णय और उसकी पहचान को गले लगा  लिया ।

 

आपको यह कहानी कैसी लगी अपने लाईक👍 और कमैंट्स द्वारा जरूर बताये ।

आपकी सहेली

अंजलि व्यास

Anjali

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