• Register as an Author at स्त्रीRang
  • Login
  • November 27, 2021

मर्तबान

अचार भरे , गँधाते , चिकने चुपड़े
मर्तबानों सरीखा प्रेम
मुंह में पानी आ जाता देखे भर
चखने पर मालूम होता
ये तो खट्टा वो तो मीठा
कोई तीखा भरा मिरचा
कोई करेला ज़हर थू
कोई बरसों चलता
कोई ताजा खवता !
कई होते जिनको अचार रुचता नहीं
खाने कहो तो बोलते पचता नहीं,
उन्हें नून रोटी पसंद होती बस ,
कितनी जायकेदार होती भला
बिन अचार रोटी ?

0 Reviews

Write a Review

Share This

Sugyata

Read Previous

रोटी

Read Next

गिट्टे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *