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  • March 4, 2021

मछली

घर के भीतर
काँच के घर में तैरती मछली
एकटक मुझे देखा करती है,
मैं एकटक मछली को देखा करती हूं!
वो हैरान मैं बिन पानी कैसे रहती हूं !
मैं हैरान वो उम्रभर पानी कैसे सहती है ?
वो खुली आँख से सोती है
मैं बंद आँख भी जगती हूं,
मरकर उसकी खुली आँख
मेरी नींदों में सोती है !
मैं उसके भीतर रोती हूं
वो मेरे भीतर सोती है!
हम सबके मन के
काँच के भीतर
एक सुंदर मछली होती है!

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